शकुनी - गांधार का राजा

22 May, 2021 Views - 373

शकुनी : गांधार का राजा
बहन : गांधारी
माता-पिता : सुवल (पिता), सुर्धमा (माता)
जन्म स्थल : गांधार आधुनिक अफगानिस्तान

महाभारत के युद्ध में शकुनी एक खलनायक की भूमिका अदा करता है । वह 100 कौरवों का मामा था और उसका प्रिय भांजा दुर्योधन था जिसे उसने अपने षड्यंत्र द्वारा हस्तिनापुर का राजा बनाने का भरसक प्रयास किया । दुसरे शब्दों में हम कह सकते है की महाभारत के युद्ध की चिंगारी को सुलगाने का काम शकुनी ने किया । शकुनी एक छल और कपटी पात्र था । वह जुए खेलने और पासा फेंकने में बहुत निपुण था । पासा फेंकने में उसका पूरा नियंत्रण था तभी शकुनी ने ध्रुत क्रिडा में बड़ी चालाकी से पासा फैंका और युधिष्टर को सब कुछ दाव पर लगाने पर मजबूर कर दिया । यहां तक कि युधिष्टर ने अपनी पत्नी द्रोपदी को भी दांव पर लगा दिया था और द्रोपदी को भी जुए में हार बैठे हालाँकि द्रोपदी पांचो पांड्वो की पत्नी थी इसलिए इसमें पांच पांडवों की सहमती होनी आवश्यक थी । लेकिन युधिष्टर के अन्य चार भाइयों ने इसका विरोध नहीं किया । दुर्योधन ने शकुनी को अपना मंत्री भी नियुक्त कर दिया था । पांडवों को शकुनी ने अनेक कष्ट दिए । शकुनी धृतराष्ट्र के दरबार में ही पड़ा रहता था । ध्रुत कीड़ा में उसने युधिष्टर को एक भी दाव जितने नहीं दिया । छल-कपट में भी वह सबसे आगे था । जैसे जैसे युधिष्टर हारता जाता त्यों-त्यों वह उन्हें उकसाता जाता जो वस्तुएं उनके पास रह गई उन्हें भी दाव पर लगाने को कहता था l

यह एक विचित्र संयोग ही था कि गांधारी जैसी पतिव्रता और उच्च विचारों की पत्नी का भाई शकुनी जैसा छल कपटी और गंदे विचारों का था । शकुनी ने कभी दुर्योधन को सही सलाह दी ही नहीं । शकुनी पासों को मानो अपने हाथों में नचाता था । उस युग में धुत क्रीडा की गिनती एक कला में हुआ करती थी । पांडवों को जब वनवास हुआ था उस समय अज्ञात वास में युधिष्टर ने भी इस कला को वृहदऋषि से सिख लिया था ।

शकुनी का सदा हस्तिनापुर में बने रहना यह बताता है की शकुनी का अपने भांजों की भलाई के लिए प्रयत्न करना । यह बात कोई गलत नहीं थी , अपने सम्बन्धियों को सभी लाभ पहुंचना चाहते है लेकिन उस लाभ का कुछ मतलब धर्म और न्याय से भी होना चाहिए वैसे भी पांडवों ने शकुनी और कौरवों का कुछ ही नहीं बिगाड़ा था । पांडव भी शकुनी के भांजे ही थे । शकुनी को पांडवों पर भी रहम करना चाहिए था । यदि शकुनी अपने भांजे कौरवों का सच्चा हितेषी होता तो उसे न्याय और प्रेमपूर्वक राह पर चलाना चाहिए था पर उसने ऐसा रास्ता पकड़ा जिसमें कौरवों का भला ही भला किया और पांडवों को सर्वनाश की ओर ले गया ।

महाभारत में शकुनी का काम बहुत नीचता का दिखता है । एक भी काम उसने अच्छा नहीं किया । कौरवों पांडवों के गृह क्लेश का सबसे बड़ा कारण शकुनी ही था ।

महाभारत के युद्ध में शकुनी सह देव के हाथों मारा गया और उसके भाई-पुत्र भी मारे गए ।


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